आस्था के नाम पर अंधविश्वास का मकडजाल
प्रशासन निभा रहा है सहयोगी भूमिका
चूरू। कार्ल माक्र्स आडम्बरी धर्म को अफीम के समान नुकसानदायक मानते थे, उनका मानना था कि यह मानव की विचारशक्ति को कुंद कर देता है, इधर हिन्दू वांग्मय में कहा गया है कि जिन कार्यों से समाज को लाभ हो वही धर्म है और जो अकर्तव्य हैं वो अधर्म है। इस प्रकार अगर कहा जाये कि धर्म अन्धविश्वास का विषय नहीं बल्कि नैतिक व्यवस्था है तो कतई अनुचित नहीं होगा। विश्वास और शक्तिओं के नाम पर ढोंगी बाबाओं पर अन्धविश्वास करना गलत है, या दूसरी तरफ ये भी कह सकते है कि आज की इस भागम भाग भरी जि़न्दगी में हर इन्सान इतनी समस्याओं में उलझा हुआ है, ऐसे में कोई भी आकर उसको उसकी समस्याओं से निजात दिलाने के नाम पर, उसकी इस कमजोरी का फायदा उठा सकता है और उठा भी रहा है। हकीक़त ये है कि आस्था के नाम पर फैलाये जा रहे अंधविश्वास से अर्जित धन सिर्फ ट्रस्टों एवं पाखंडियों को अरबपति बनाने के काम आता है और इससे की जाती है ऐसी राजनीति जिसका आम आदमी के लिये कोई उपयोग नहीं है। यहां बात की जा रही है जिलामुख्यालय पर आयोजित बाबोसा महोत्सव की, जहां आस्था के नाम पर अंधविश्वास का मकडजाल बुना जा चुका है जिसमें प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी सहयोगी भूमिका निभा रहा है। जनचर्चा है कि यहां बाबोसा के नाम पर सनातन धर्मी आस्थाओं पर चोट करने की कुचेष्टाऐं की जा रही है क्योंकि सनातनियों के सर्वपुज्य देव हनुमानजी जैसा रूप बाबोसा को दिया गया है और हनुमान अवतार का भ्रम फैलाया जा रहा है, साथ ही विज्ञान के चमत्कार और करोडों के विज्ञापन की चकाचौंध का सहारा लेकर पित्तर बाबोसा को चमत्कारी देव बाबोसा, फिर देवाधिदेव बाबोसा और अब बाबोसा भगवान बना दिया गया है।
यूं होती है आस्था के नाम पर लूट
ग्यारह रूपये की मिठाई को भव्य और चमत्कारी प्रसाद के रूप में प्रचारित कर ग्यारह सौ, इक्कीस सौ, इक्यावन सौ और सवा लाख रूपये तक में भोली-भाली जनता को बेचा जाता है। इतना ही नहीं अभिमंत्रित जल, चमत्कारी भभुति, दिव्य ज्योत, छप्पन भोग के नाम पर आमजन से मोटी राशि वसुली जाती है। इन तथाकथित चमत्कारी वस्तुओं को लेकर पुस्तकें, पेम्पलेट इत्यादि शहर में बंटवाकर असाध्य बिमारियों तक का इलाज करने का प्रचार किया जा रहा है साथ ही युवाओं को दिग्भ्रमित कर झुठी एवं काल्पनिक चमत्कारी घटनाओं को अतिश्योक्तिपुर्ण तरीके से आमजन में फैलाया जाता है, इनके झांसे में आकर जनता इस महोत्सव में ना केवल अपना अमुल्य समय अपितु धन भी गंवाकर जाते है। वरिष्ठ समाजवादी नेता माधव शर्मा का इस सम्बन्ध में कहना है कि आमजन को यह समझना चाहिए कि सभी दिन एक जेसे नहीं होते, कभी अच्हे तो कभी बुरे, कभी पतझड़ तो कभी बहार, जि़न्दगी इसी का नाम है अपने दुखों से विचलित हो कभी भटकें नहीं, किसी ढोंगी पर विश्वास न करें, सिर्फ उस परम पिता परमात्मा पर उस भगवान पर जिसे भी आप मानते है उस पर विश्वास रखे, सब ठीक होगा।
कोई नया नहीं है यह खेल
यह कडवी सच्चाई है कि रूपयों की चकाचोंध से प्रचारित भक्त की गोद में बैठकर कृपा बरसाने वाली वाली स्त्री को महामण्डलेश्वर की उपाधि दे दी जाती हैं और विरोध के बाद ही आमजन को होश आता है। झारखण्ड में ईंट भट्टा चलाने वाला व्यक्ति, दिल्ली मे आकर समोसे की हरी चटनी और काले पर्स की ‘ किरपा ‘ वाला बाबा बन के करोड़ों की सम्पत्ति बना लेता है, नित्यानंद और भीमानन्द जैसे काम पिपासु पाखण्डी बाबा जो करोडों के चक्कर में सेक्स रैकेट चलाते थे, धन को दुगना करने का झांसा देकर सांसी समाज के लोगों से करोडों रूपये की लुट की जाती है, लेकिन लम्बे समय से आम आदमी के साथ होती आयी आस्था और अंधविश्वास की इस लूट का विरोध ना तो कभी प्रशासन ने किया है और ना ही जनप्रतिनिधियों ने क्योंकि आस्था से जुड़ा मामला है सवाल उठा दिये तो सवाल उठ खडे होने का डर जो रहता है। अब यहां पन्नालाल चेरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी प्रकाश कोठारी की पत्नी मंजु कोठारी को अलौकिक रूप में दर्शाते हुए महिमामंडन का कार्य किया जा रहा है। कहीं इन्हे हवा में तैरते हुए दर्शाया जाता है, कहीं ऐसा जैसे कोई अलौकिक शक्ति भीतर समाहित हो गयी हो, कम्प्युटर का सहारा लेकर इनकी ऐसी तस्वीरे पेश की जाती है जिन्हे देखकर भोली-भाली जनता सच्चाई को समझ ही नहीं पाती है।
जनप्रतिनिधि एवं प्रशासन की भूमिका
प्रभावशाली जन जब किसी समारोह में शिरकत करते है तो आमजन उनका अनुसरण करते ही हैं, क्योकि यह एक आम धारणा बन जाती है कि जब इतने प्रभावशाली लोग इस समारोह में शिरकत कर रहे हैं तो जरूर कोई ना कोई बात आवश्यक है। बाबोसा महोत्सव के मिंगसर मैले को लेकर वितरित किये गये आमन्त्रण पत्र में योजनाबद्ध तरीके से ना तो किसी जनप्रतिनिधि को भूला गया है ना ही किसी प्रशासनिक अधिकारी को। इसमें मुख्य अतिथि विधायक मंडेलिया एवं सांसद नरेन्द्र बुडानियां, विशिष्ट अतिथि जिला कलेक्टर रोहित गुप्ता, पुलिस अधीक्षक औमप्रकाश, अतिरिक्त जिला कलेक्टर सत्तार खां, पंचायत समिति प्रधान रणजीत सातडा, अति0 पुलिस अधीक्षक राजकुमार, द्रोणाचार्य पुरूस्कार विजेता वीरेन्द्र पूनियां, कष्णा पुनियां, बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के पुर्व अध्यक्ष इन्द्रराज सैनी, पुर्व मन्त्री राजेन्द्र राठौड, समाजसेवी पथ्वीसिंह राठौड, गेस्ट ऑफ आनर सभापति गोविन्द महनसरिया को बताया गया है। इस सबको देखकर आमजन तो यही सोचेगा ना कि इतने बडे-बडे लोग कहीं बेवकुफ थोडे ना बनाये जा सकते है कुछ तो ‘‘चमत्कार’’ है ही।
करोडों की जोहड पायतन भूमि को हडपने का प्रयास
शहर में दाखिल होने से पहले राष्ट्रीय राजमार्ग 65 पर एक विशालकाय स्टेच्यु का निर्माण किया गया है, जब भी कोई नया व्यक्ति यहां आता है तो यही कहता है कि यह हनुमानजी की मुर्ति है लेकिन उसे सच्चाई समझाने में लगभग एक घण्टा लग जाता है। बहुत ही कम लोग जानते है कि इस स्टेच्यु का निर्माण जिस भूमि पर किया गया है वह जोहड पायतन की भूमि है और माननीय उच्चतम न्यायालय ने अब्दुल रहमान बनाम सरकार के मामले में यह स्पष्ट किया है कि जोहड पायतन कि भूमि का अंतरण नहीं हो सकता है, इसके बावजुद भी इस भुमि का ट्रस्ट के कब्जे में आना कई रहस्यों का निर्माण करता है, अब आवश्यकता है तो इन रहस्यों पर से पर्दा उठाने की।
एकल खिडकी में भी लगी है मुर्ति
जिलामुख्यालय पर कलेक्ट्रेट परिसर में नवनिर्मित एकल खिडकी भवन में भी बाबोसा को महिमामंडित करने के उद्देश्य से एक मुर्ति की स्थापना की गयी है। इस सम्बन्ध में अनेको धर्मावलम्बी के लोगों ने मांग कि है कि वह भी कलेक्ट्रेट परिसर में वे भी जनकल्याणर्थ प्याऊ या अन्य कोई भवन बनाकर अपने-अपने पुर्वजों की मुर्ति लगवाने के इच्छुक हैं। यहां तक कि शिरडी के सांई बाबा की मुर्ति लगाने की भी मांग की जा रही है। अब सवाल यह है कि क्या इस तरह से मुर्ति लगवाना कानून सम्मत है ? हालांकि गुरूवार को हुई प्रेस वार्ता में प्रभारी मन्त्री कुन्नर ने इसकी जांच करवाने के लिए जिला कलेक्टर को कहा भी है।